बिहार

दून एक्सप्रेस में मिले 45 जिंदा कछुए, गया जंक्शन पर जांच के दौरान लावारिस बैग से बरामद

Kavita2
16 Sept 2026 5:18 PM IST
दून एक्सप्रेस में मिले 45 जिंदा कछुए, गया जंक्शन पर जांच के दौरान लावारिस बैग से बरामद
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गया: ऋषिकेश से हावड़ा जा रही दून एक्सप्रेस में वन्यजीव तस्करी की आशंका से जुड़ा मामला सामने आया है। गया जंक्शन पर ट्रेन की जांच के दौरान स्लीपर कोच से 45 जीवित कछुए बरामद किए गए हैं। कछुओं को दो झोलों और एक पिट्ठू बैग में भरकर लावारिस हालत में रखा गया था। आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम ने सभी कछुओं को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर वन विभाग को सौंप दिया है।

रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेल पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ट्रेन में अवैध तरीके से वन्यजीवों के परिवहन की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है कि कछुओं को किसने और कहां से लाकर ट्रेन में रखा था।

गया जंक्शन पर जांच के दौरान मिली जानकारी

आरपीएफ के अनुसार, मंगलवार रात करीब 8:50 बजे 13010 डाउन दून एक्सप्रेस गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर पहुंची थी। नियमित जांच के दौरान आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम स्लीपर कोच एस-8 में पहुंची।

इसी दौरान कोच के बाथरूम के बाहर दो झोले और एक पिट्ठू बैग लावारिस हालत में दिखाई दिए। टीम ने जब बैगों की जांच की तो उनके अंदर बड़ी संख्या में जीवित कछुए मिले। बैग खुलने के बाद मौके पर मौजूद जवान भी हैरान रह गए।

बैग में मिले 45 जीवित कछुए

जांच के दौरान बरामद किए गए बैगों से कुल 45 जीवित कछुए मिले। सभी कछुओं को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया और उन्हें सुरक्षित संरक्षण में लिया गया।

आरपीएफ और जीआरपी की टीम ने मामले की सूचना संबंधित विभागों को दी। इसके बाद बुधवार को सभी कछुओं को वन विभाग के अधिकृत कर्मचारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया।

वन विभाग अब बरामद किए गए कछुओं की प्रजाति, स्वास्थ्य स्थिति और उनके संरक्षण को लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।

तस्करी की आशंका, जांच में जुटी एजेंसियां

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, लावारिस बैग में इतनी बड़ी संख्या में कछुओं का मिलना गंभीर मामला है। आशंका जताई जा रही है कि इन्हें अवैध तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी।

हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन बैगों को ट्रेन में कौन लेकर आया था और इन्हें बाथरूम के बाहर किस उद्देश्य से छोड़ा गया। आरपीएफ और जीआरपी अब ट्रेन में मौजूद यात्रियों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी है।

यात्रियों से भी ली जा सकती है जानकारी

जांच एजेंसियां अब कोच एस-8 में सफर करने वाले यात्रियों से पूछताछ कर सकती हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन और ट्रेन में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा सकती है, ताकि बैग रखने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके।

रेलवे सुरक्षा बल समय-समय पर ट्रेनों और रेलवे परिसरों में अवैध सामानों की जांच करता है। वन्यजीवों की तस्करी रोकने के लिए भी रेलवे और वन विभाग के बीच समन्वय से कार्रवाई की जाती है।

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई

कछुए वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित जीवों की श्रेणी में आते हैं। इनके अवैध परिवहन या व्यापार पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। बिना अनुमति वन्यजीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना अपराध माना जाता है।

बरामद कछुओं को वन विभाग को सौंपे जाने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया वन विभाग की ओर से पूरी की जाएगी।

आरपीएफ की सतर्कता से हुई बरामदगी

इस पूरे मामले में आरपीएफ और जीआरपी की सतर्कता अहम रही। नियमित जांच के दौरान संदिग्ध बैगों पर नजर पड़ी, जिसके बाद जांच करने पर यह मामला सामने आया।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए ट्रेनों में लगातार निगरानी की जाती है। इसी अभियान के तहत दून एक्सप्रेस में यह कार्रवाई की गई।

फिलहाल 45 कछुओं को सुरक्षित वन विभाग को सौंप दिया गया है और बैग रखने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए जांच जारी है।

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